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Bihar News: रिश्वतखोरी मामले में सीतामढ़ी के पूर्व PF पदाधिकारी को 5 साल की सजा, विशेष अदालत का फैसला

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Alam Ki Khabar |Sitamarhi NewslBihar News | Patna News | सीतामढ़ी के तत्कालीन जिला भविष्य निधि पदाधिकारी को रिश्वतखोरी मामले में विशेष निगरानी न्यायालय ने दोषी करार देते हुए 3 और 5 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है।

मुजफ्फरपुर, 6 अगस्त। आलम की खबर: भ्रष्टाचार के एक चर्चित मामले में विशेष निगरानी न्यायालय ने सीतामढ़ी के तत्कालीन जिला भविष्य निधि (पीएफ) पदाधिकारी प्रदीप कुमार को दोषी करार देते हुए सश्रम कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई है। अदालत ने माना कि आरोपी ने भविष्य निधि से जुड़े कार्य के बदले रिश्वत की मांग की थी और निगरानी टीम ने उसे रकम लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया था।

विशेष न्यायाधीश दशरथ मिश्र की अदालत ने 5 अगस्त को सुनाए गए फैसले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7 के तहत तीन वर्ष के सश्रम कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। वहीं अधिनियम की धारा 13(2) सहपठित धारा 13(1)(डी) के तहत पांच वर्ष के सश्रम कारावास और 10 हजार रुपये अर्थदंड का भी आदेश दिया। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जुर्माना जमा नहीं करने की स्थिति में दोषी को एक माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। दोनों सजाएं एक साथ चलेंगी।

यह मामला वर्ष 2014 का है। शिकायतकर्ता खुबीलाल कुमार ने आरोप लगाया था कि भविष्य निधि से संबंधित कार्य पूरा करने और भुगतान योग्य कमीशन चालू कराने के बदले तत्कालीन जिला भविष्य निधि पदाधिकारी ने 20 हजार रुपये रिश्वत की मांग की थी। शिकायत मिलने के बाद निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने आरोपों का सत्यापन कराया।

सत्यापन में शिकायत सही पाए जाने पर 9 दिसंबर 2014 को निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की टीम ने जाल बिछाकर आरोपी को 20 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया था। इसके बाद मामले में विधिवत प्राथमिकी दर्ज कर अनुसंधान शुरू किया गया।

मामले की जांच तत्कालीन पुलिस निरीक्षक मुशरी प्रसाद ने पूरी की और निर्धारित समय के भीतर आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 12 गवाहों को अदालत में पेश किया। विशेष लोक अभियोजक कृष्ण देव शाह ने साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर अदालत के समक्ष पक्ष रखा, जिसके बाद न्यायालय ने आरोपी को दोषी मानते हुए सजा सुनाई।

निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के अनुसार वर्ष 2026 में अब तक भ्रष्टाचार से जुड़े 13 मामलों में अदालतें दोषियों को सजा सुना चुकी हैं। ब्यूरो का कहना है कि सरकारी तंत्र में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई आगे भी इसी तरह जारी रहेगी और दोषियों को कानून के दायरे में लाया जाएगा।

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भ्रष्टाचार पर सख्ती से बढ़ेगा भरोसा

सरकारी कार्यालयों में रिश्वतखोरी आम लोगों के अधिकारों पर सीधा असर डालती है। ऐसे मामलों में समयबद्ध जांच और न्यायालय से दोषियों को सजा मिलना व्यवस्था में जनता का विश्वास मजबूत करता है। साथ ही यह संदेश भी जाता है कि भ्रष्टाचार के मामलों में कानूनी कार्रवाई से बचना आसान नहीं है। यदि इसी तरह निष्पक्ष कार्रवाई जारी रही तो सरकारी सेवाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही दोनों मजबूत होंगी।

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